शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

गुनाह....

             मेरे  घर के पास एक घर है....... करीब १७  साल पहले की बात  है ....उस घर में एक पति पत्नी और एक लड़का रहता था ,पत्नी अक्सर बीमार रहती थी ...लड़के की उम्र यही कोई ३ -४ साल रही होगी .....परिवार गरीब तो नहीं था पर मध्यम वर्गीय भी नहीं कह सकते .....कुछ दिनों बाद उनके घर में एक बच्चे ने जन्म लिया ....रोने की आवाज सुनते ही पिता ने पूछा लड़का हुआ या लड़की ??? नर्स ने दबे स्वर में उत्तर दिया लड़की हुई है .....पिता दांत पीस कर रह गया उसने  तुरंत रेडियो पर गाने बंद कर दिए ... ...माँ रोने लगी और उसने अपने बच्चे का मुहं भी नहीं देखा.......घर में मातम छा गया ......पिता को तो लगा जैसे वो मुह दिखाने लायक ही न रहा हो .....लोग पूछेगे तो क्या जवाब देगा लड़की हुई है.....खैर जैसे तैसे उन्होंने उसको पालने का निर्णय लेते हुए बोला चलो घर का काम करेगी..
             लडकी धीरे -धीरे बड़ी होने लगी ... अपने आस पास की दुनिया को जानने लगी .....लड़की आस-पास के बच्चो को देखती तो उसका मन भी उनके साथ खेलने का करता . .....वो बोलती माँ मुझे भी भैया के साथ खेलने जाना है ...इस पर माँ डांट कर मना कर देती ...लड़की जिद करती तो उसके गाल पे थप्पड़ जड़ दिया जाता....
             लड़का स्कूल पढने जाता लड़की उसकी किताबे देख कर रह जाती .....स्कूल से आने पर माँ की गोद में बैठ कर खाना खाता ...लड़की सोचती रह जाती माँ उसे कभी इतने प्यार से खाना क्यों नहीं खिलाती .....लड़की को बोला जाता बाहर मत जाओ ,किसी लड़के से बात मत करो ....बाथरूम में नहाओ ... उसको समझ नहीं आता ये सब क्यों बोलते हैं भैया को तो नहीं बोलते.....लड़की स्कूल जाने की जिद करती तो माँ बोलती वहां बहुत फीस लगती है ..... लड़का रात को गिलास भर के दूध पीता लड़की देखती रह जाती... दिन भर घर का सारा काम करती और हर वक्त माँ की सेवा करती उसको साँस लेने भर की फुर्सत नहीं मिलती ....एक दिन खिड़की पे खड़ी थी तो गाने की आवाज सुनाई दी उसका भी मन किया वो टीवी देखे ..वो चुपचाप सभी को सोता देख पडोसी की खिड़की पे जाकर टीवी देखने लगी ...माँ की आवाज नहीं सुन पाई टीवी का मोह नहीं छोड़ पाई...तभी भाई ने आकार लड़की के गाल पर २ - ४ थप्पड़ जड़ दिए ....
            लड़की और बड़ी होने लगी घर वालो को चिंता सताने लगी .....माँ ने बोला इसका जल्द से जल्द ब्याह करा देते हैं .....सब लोग बातें बनाने लग गए है ...अभी पडोसी का लड़का इसको घूर -घूर के देख रहा था कही कुछ उंच नीच हो गई तो क्या मुहं दिखायेंगे ... अपने घर जाये......
ये सब सुनकर लड़की डर गई ...... रोज उसे ताने सुनने को मिलते ऐसे काम करेगी तो ससुराल वाले भगा देंगे  ...... घर वालों ने उसकी शादी पड़ोस के गांव के कुम्हार के लड़के से तय कर दी .........ये बात पड़ोस के एक लड़के को रास नहीं आयी.......उसने लड़की के घर पे जाकर हंगामा किया की इसकी शादी अगर उसके साथ नहीं के गई तो वो घर को आग लगा देगा.....पिता घर पे नहीं था माँ ने ये बात पिता को बताई तो पिता ने उस लड़के को कुछ कहने के बजे लड़की पे गुस्सा उतार दिया...उसे तरह तरह की गालिया देकर चरित्रहीन घोषित कर दिया........लड़की की शादी जल्द करने का फैसला किया गया....
एक दिन पिता ने निर्णय लिया कि वो लड़के वालों के यहाँ जाकर शादी जल्द करने के लिए कहेगा ....वो लड़की के भाई को साथ लेकर निकल गया .......
           फिर क्या था उस दुष्ट लड़के को मौका मिल गया .....माँ काफी बीमार थी और गहरी नींद में सो रही थी....रात के २ बजे जब सन्नाटा पसरा हुआ था ....पूरा मोहल्ला सो गया वो लड़का उसके घर में घुस आया ...लडकी गहरी नींद में सो रही थी ...उसका मुहं जोर से बंद करके उसको दबोच कर वो ले गया .....कोई आवाज नहीं हुई ..लड़की ने काफी हाँथ पैर मरे पर वो माँ को जगाने में नाकाम रही......सुबह जब पिता और भाई आये और लडकी को आवाज लगाई तो पता चला कुछ गड़बड़ है जाकर देखा तो लड़की बेसुध होकर खून से लतपथ जमीन पे पड़ी है ....जानवरों की कोठरी में.......
पिता का गुस्सा उबाल पे था .... माँ ने सर पीट लिया.. ....कुछ देर बाद भाई को बोला डॉक्टर को ले आओ पिता ने डांट कर मना कर दिया ......बदनामी का इतना डर था उसे कि उसके आगे कुछ दिखाई नहीं दिया.......पिता से नहीं रहा गया उसने पास रखे मिटटी के तेल को लड़की पे डालकर आग लगा दी ......माँ और भाई ये करतब देखते रह गए .....अपने ही हाथों अपनी बेटी को जिन्दा जला दिया उसने,  सिर्फ बदनामी के डर से.............

             जब भी मैं ये घटना याद करती हूँ मेरी रूह कॉप जाती है.........पारुल को ज़िंदा जला दिया गया ...सब जानते हैं न तो किसी को सजा हुई न कोई छानबीन हुई इस घटना की...............माँ ने बयां दे दिया बेटी ने आत्महत्या कर ली , पड़ोस के लड़के से उसका चक्कर चल रहा था और हम लोग उसकी शादी करवा रहे थे... लोग भी शांत हो गए कुछ दिनों बाद और ये घटना एक मामूली सी आत्महत्या बन कर रह गई.......

             ऐसी न जाने कितनी लडकियां जलती रही है ...ये कोई नई घटना नहीं है.,और न ही  सदियों पुरानी २००७ की घटना है ये २१ व़ी सदी में भी ये सब हो रहा है .... हर एक हत्या को आत्महत्या का नाम दे दिया जाता है... लडकी होना  हमारे  देश में सबसे बड़ा पाप है.......न जाने कब बदलेगी हमारे देश की ये सोच ,जब लडकी को  सामान दर्जा मिल जायेगा..... वो लड़की आज भी अपने घर वालों से और समाज से सवाल करती है आखिर किस गुनाह की सजा मिली उसको....???
 

7 टिप्‍पणियां:

  1. त्रासद घटना है. लेकिन मुझे लगता है कि अगर सारी लड़कियाँ अपने आस-पास हो रही ऐसी बातों के बारे में लोगों से बताएँ और उनके साथ आवाज़ उठायें तो बहुत कुछ बदल सकता है. मेरे गाँव में ऐसे ही एक चाचा जी के यहाँ लड़कियों के साथ बहुत भेदभाव होता था. गाय-भैंस का चारा-पानी वो लोग करती थीं, और दूध भाई को मिलता था. लड़कियाँ सारा काम भी करती थीं और सब्ज़ी वगैरह खाने को नहीं मिलता था, जबकि वो लोग अच्छे खासे संपन्न परिवार के थे, कोई गरीब नहीं थे. जब हमलोग गाँव गए तो हमलोगों ने चाचा जी को मनाया लड़कियों को पढ़ाने के लिए. हमारे घर में बराबरी का माहौल देखकर लड़कियों ने अपने यहाँ होने वाले भेदभाव का विरोध करना शुरू किया. बड़ी चिल्ल-पों मची घर में उनके कि लड़कियाँ बिगड़ गयी हैं. हम पर भी इल्जाम लगा कि हमलोग लड़कियों को बर्बाद कर रहे हैं. लेकिन लड़कियाँ लड़-झगड़कर पढ़ पाईं. एक ने उसमें से बी.एड. भी कर लिया.
    इस अन्याय का विरोध करना ही होगा. सभी लड़कियों को.

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  2. Seems as if we r makin rapists at our home..

    anyway, nice attempt at writing.. keep posting.. gud luck :)

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  3. बधाई संग आपको याद दिला रहे है कि बहुत कुछ लिखना शेष है
    देखिएगा
    http://blogsinmedia.com/?p=23706

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