बुधवार, 10 अप्रैल 2013

पहला साल



ये साल गुजर जाने वाला है और ,कितनी बाते बाकी  हैं अभी तुम्हे और मुझे कहने -सुनने को ,कितनी छोटी है ये जिंदगी ये बताने के लिए कि तुम मेरे लिए क्या हो ? कभी कभी मुझे लगता है की कही दूर चले जाये इस दुनिया से जहाँ कुछ भी तुम्हे परेशां न कर सके और तुम अपनी जिंदगी में सिर्फ  महसूस कर सको  तो वो हमारी जिंदगी हो हमारी खुशियाँ ......तुम्हे याद है पिछले साल मैंने तुम्हारे लिए कुछ सपने देखे थे और तोहफे में तुम्हे भी एक सपना दिया था मुझे उम्मीद है तुमने उस तोहफे को सम्हाल कर रखा होगा ...और साल दर साल हम उसे देखकर अपने बिताये हुए पल याद कर सकेगे ....तुमने मुझसे एक गुजारिश की थी "मेरे साथ चलोगी न "  तो देखो अंशु तुम्हारे साथ चल पड़ी है अपनी जिंदगी का रास्ता तय करने ...इस  वादे के साथ कि वो तुम्हे हमेशा खुश रखेगी...   

तुमने कभी सोचा नहीं था न कि मैं तुमसे अपने प्यार का कभी इकरार करुगी शायद तुमने उम्मीद भी छोड़ दी थी और अपनी हर कविता के साथ हमारी यादों को जोड़ते चले गए जो की अब लाल गुलाब वाला गुलदस्ता जैसा लगता है जिसे पढ़ के आंखे तो  भीग ही जाती हैं और मैं  तो अन्दर तक भीग जाती हूँ तुम्हारे प्यार से ,पर उन यादों में अब एक दूसरे  को खोने का डर नहीं है ,है तो बस एक सुकून और हर याद के साथ एक मुस्कान आखिर हम एक दुसरे से यही वादा  लिया करते थे की जहाँ भी रहेगे ये सब पढ़ कर मुस्करायेगे ..

और तुम्हे अपने पास वाली विंडो सीट खली छोड़ने की जरूरत नहीं क्यों की वो खाली नहीं होगी अब वहां मैं  रहूगी हमेशा ...

मुझे ये एहसास है तुम इन  दिनों  परेशां हो पर अब हम हर परेशानी का साथ -साथ सामना करेगे ...तुम्हारी परेशानी मैं दूर तो नहीं कर सकती पर हाँ तुम्हारा हौसला जरूर बन सकती हूँ ....मुझे कभी अलग मत करना अपनी परेशानियों से क्यों की मै अब तुम्हारे साथ चल पड़ी हूँ .....

तुमसे मुझे इस एक साल में सब कुछ मिला  वो इतने सारे पल जिन्हें मैं जिंदगी भर याद  करूंगी ....अपने इस रिश्ते  का पहला साल मुबारक हो ....:-)

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

गुनाह....

             मेरे  घर के पास एक घर है....... करीब १७  साल पहले की बात  है ....उस घर में एक पति पत्नी और एक लड़का रहता था ,पत्नी अक्सर बीमार रहती थी ...लड़के की उम्र यही कोई ३ -४ साल रही होगी .....परिवार गरीब तो नहीं था पर मध्यम वर्गीय भी नहीं कह सकते .....कुछ दिनों बाद उनके घर में एक बच्चे ने जन्म लिया ....रोने की आवाज सुनते ही पिता ने पूछा लड़का हुआ या लड़की ??? नर्स ने दबे स्वर में उत्तर दिया लड़की हुई है .....पिता दांत पीस कर रह गया उसने  तुरंत रेडियो पर गाने बंद कर दिए ... ...माँ रोने लगी और उसने अपने बच्चे का मुहं भी नहीं देखा.......घर में मातम छा गया ......पिता को तो लगा जैसे वो मुह दिखाने लायक ही न रहा हो .....लोग पूछेगे तो क्या जवाब देगा लड़की हुई है.....खैर जैसे तैसे उन्होंने उसको पालने का निर्णय लेते हुए बोला चलो घर का काम करेगी..
             लडकी धीरे -धीरे बड़ी होने लगी ... अपने आस पास की दुनिया को जानने लगी .....लड़की आस-पास के बच्चो को देखती तो उसका मन भी उनके साथ खेलने का करता . .....वो बोलती माँ मुझे भी भैया के साथ खेलने जाना है ...इस पर माँ डांट कर मना कर देती ...लड़की जिद करती तो उसके गाल पे थप्पड़ जड़ दिया जाता....
             लड़का स्कूल पढने जाता लड़की उसकी किताबे देख कर रह जाती .....स्कूल से आने पर माँ की गोद में बैठ कर खाना खाता ...लड़की सोचती रह जाती माँ उसे कभी इतने प्यार से खाना क्यों नहीं खिलाती .....लड़की को बोला जाता बाहर मत जाओ ,किसी लड़के से बात मत करो ....बाथरूम में नहाओ ... उसको समझ नहीं आता ये सब क्यों बोलते हैं भैया को तो नहीं बोलते.....लड़की स्कूल जाने की जिद करती तो माँ बोलती वहां बहुत फीस लगती है ..... लड़का रात को गिलास भर के दूध पीता लड़की देखती रह जाती... दिन भर घर का सारा काम करती और हर वक्त माँ की सेवा करती उसको साँस लेने भर की फुर्सत नहीं मिलती ....एक दिन खिड़की पे खड़ी थी तो गाने की आवाज सुनाई दी उसका भी मन किया वो टीवी देखे ..वो चुपचाप सभी को सोता देख पडोसी की खिड़की पे जाकर टीवी देखने लगी ...माँ की आवाज नहीं सुन पाई टीवी का मोह नहीं छोड़ पाई...तभी भाई ने आकार लड़की के गाल पर २ - ४ थप्पड़ जड़ दिए ....
            लड़की और बड़ी होने लगी घर वालो को चिंता सताने लगी .....माँ ने बोला इसका जल्द से जल्द ब्याह करा देते हैं .....सब लोग बातें बनाने लग गए है ...अभी पडोसी का लड़का इसको घूर -घूर के देख रहा था कही कुछ उंच नीच हो गई तो क्या मुहं दिखायेंगे ... अपने घर जाये......
ये सब सुनकर लड़की डर गई ...... रोज उसे ताने सुनने को मिलते ऐसे काम करेगी तो ससुराल वाले भगा देंगे  ...... घर वालों ने उसकी शादी पड़ोस के गांव के कुम्हार के लड़के से तय कर दी .........ये बात पड़ोस के एक लड़के को रास नहीं आयी.......उसने लड़की के घर पे जाकर हंगामा किया की इसकी शादी अगर उसके साथ नहीं के गई तो वो घर को आग लगा देगा.....पिता घर पे नहीं था माँ ने ये बात पिता को बताई तो पिता ने उस लड़के को कुछ कहने के बजे लड़की पे गुस्सा उतार दिया...उसे तरह तरह की गालिया देकर चरित्रहीन घोषित कर दिया........लड़की की शादी जल्द करने का फैसला किया गया....
एक दिन पिता ने निर्णय लिया कि वो लड़के वालों के यहाँ जाकर शादी जल्द करने के लिए कहेगा ....वो लड़की के भाई को साथ लेकर निकल गया .......
           फिर क्या था उस दुष्ट लड़के को मौका मिल गया .....माँ काफी बीमार थी और गहरी नींद में सो रही थी....रात के २ बजे जब सन्नाटा पसरा हुआ था ....पूरा मोहल्ला सो गया वो लड़का उसके घर में घुस आया ...लडकी गहरी नींद में सो रही थी ...उसका मुहं जोर से बंद करके उसको दबोच कर वो ले गया .....कोई आवाज नहीं हुई ..लड़की ने काफी हाँथ पैर मरे पर वो माँ को जगाने में नाकाम रही......सुबह जब पिता और भाई आये और लडकी को आवाज लगाई तो पता चला कुछ गड़बड़ है जाकर देखा तो लड़की बेसुध होकर खून से लतपथ जमीन पे पड़ी है ....जानवरों की कोठरी में.......
पिता का गुस्सा उबाल पे था .... माँ ने सर पीट लिया.. ....कुछ देर बाद भाई को बोला डॉक्टर को ले आओ पिता ने डांट कर मना कर दिया ......बदनामी का इतना डर था उसे कि उसके आगे कुछ दिखाई नहीं दिया.......पिता से नहीं रहा गया उसने पास रखे मिटटी के तेल को लड़की पे डालकर आग लगा दी ......माँ और भाई ये करतब देखते रह गए .....अपने ही हाथों अपनी बेटी को जिन्दा जला दिया उसने,  सिर्फ बदनामी के डर से.............

             जब भी मैं ये घटना याद करती हूँ मेरी रूह कॉप जाती है.........पारुल को ज़िंदा जला दिया गया ...सब जानते हैं न तो किसी को सजा हुई न कोई छानबीन हुई इस घटना की...............माँ ने बयां दे दिया बेटी ने आत्महत्या कर ली , पड़ोस के लड़के से उसका चक्कर चल रहा था और हम लोग उसकी शादी करवा रहे थे... लोग भी शांत हो गए कुछ दिनों बाद और ये घटना एक मामूली सी आत्महत्या बन कर रह गई.......

             ऐसी न जाने कितनी लडकियां जलती रही है ...ये कोई नई घटना नहीं है.,और न ही  सदियों पुरानी २००७ की घटना है ये २१ व़ी सदी में भी ये सब हो रहा है .... हर एक हत्या को आत्महत्या का नाम दे दिया जाता है... लडकी होना  हमारे  देश में सबसे बड़ा पाप है.......न जाने कब बदलेगी हमारे देश की ये सोच ,जब लडकी को  सामान दर्जा मिल जायेगा..... वो लड़की आज भी अपने घर वालों से और समाज से सवाल करती है आखिर किस गुनाह की सजा मिली उसको....???
 

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

लिखते रहना हमेशा...

        ये शब्दों से खेलने की जगह नहीं है, बस तुम्हारे सपने, तुम्हारी खुशियाँ, तुम्हारी उलझन को तुम्हारे अन्दर से बाहर निकालने की कोशिश है... सच कहूं, तो तुम कैसा लिखती हो इसकी परवाह कभी मत करना... बस लिखते रहना... किसी और के लिए नहीं तो बस सिर्फ अपने लिए, अपनी ख़ुशी के लिए.... खुद को पढने के लिए... पता नहीं मैं और मेरे शब्द ज़िन्दगी के किस मोड़ तक तुम्हारे साथ रह पायेंगे, लेकिन तुम्हारे अपने शब्दों में बुने ये अनमोल पल हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे, जिन्हें खुद तुम अपनी सोच के साथ आज़ाद कर दोगी...  इन सादे पन्नो पर अपनी हर उस ख़ामोशी को शोर करने देना जो तुम्हें परेशान करती है... हर वो ख़ुशी जिसकी धुन में तुम मगन होकर थिरकना चाहती हो... हर उस जगह की बनावट को उतरने देना जहाँ भी तुम्हारी सोच ले जाए, जिस भी पगडण्डी पर तुम यूँ ही अकेले सैर कर आती हो... हर उस जगह जहाँ अब तक किसी को भी पहुँचने नहीं दिया है तुमने...
          इन कोरे पन्नों को तुम्हारी ज़िन्दगी की उलझी गिरह को सुलझाने का इंतज़ार रहेगा... और हाँ ये ब्लॉग तुम्हारा है और हमेशा ही तुम्हारा ही रहेगा... एक तोहफा ही समझ लेना मेरी तरफ से, और इस तोहफे के बदले में हमेशा की तरह एक मुस्कान उछाल देना इस आसमान की तरफ... मैं भी बीच बीच में यहाँ उछल-कूद मचाता रहूँगा...